Anuvad (Journal 196-197)

About This Book
कहानी कहना-सुनना हमारी फ़ितरत में शामिल है, भले ही हम लेखक हों या न हों। हो सकता है सबसे पहली कहानी तब जन्मी हो जब कि सी आदि मानव ने आकाश में टि मटि माते तारों में अपने मृत प्रि यजनों को खोजा होगा, या जब पहली बार कि सी ने चांद में बूढ़ी दादी को, या ख़रगोश को दखे ा होगा या जब गफु ाओ ंम ें रहने वाले इंसान ने शब्द-ज्ञान न होते हुए भी दीवारों पर चित्र उकेरे होंगे। क्या उन चि त्रों में कोई कहानी रची-बसी होगी? जब भाषाएं अस्ति त्व में आई होंगी, तो कहानि यों को शब्द मिले। अब भाषाएं कब और कैसे अस्ति त्व में आई, यह आज भी एक बड़ा रहस्य है, भले ही हम इस बारे में कि तने ही अनुमान लगाते रहें। यह देखना अद्भुत ही है कि देश-वि देश में, हर भाषा, हर संस्कृति में कहानि यों का अस्ति त्व, उनकी रूपरेखा समान है। मानव जीवन की पीड़ा , दुख- सुख, इच्छाएं सब जगह एक से होते हैं। हमारे इस अनूदि त कहानी वि शेषांक की कहानि यां भी इस तथ्य को सामने लाती हैं। कहानि यां मनुष्य की कल्पना की उड़ा न होती हैं। युगों-युगों से हर देश, हर भाषा, हर संस्कृति में कहानि यां गुथी रही हैं और व्या पार, ज्ञान की पि पासा, शेष संसार को जानने के जि ज्ञासु, धर्मों के प्रचारक अपने साथ अपने देशों की कहानी भी दूसरे स्था नों पर ले गए होंगे। कह सकते हैं अनुवाद की अनौपचारिक शुरुआत इन्हीं लोगों ने की होगी। इस बात से तो कि सी को इंकार नहीं हो सकता कि अनुवाद ने हमेशा से ही संस्कृति यों के बी च एक पुल का काम कि या है। और साहि त्य समाज का, संस्कृति का दर्पण होता है। कहानि यों ने भी हमेशा ही इस दायि त्व को नि भाया है।
Details
- Author
- Bhartiya Anuvad Parishad
- Publisher
- Tethys Books
- Published date
- 25 Feb, 2026
- Type
- Paperback
- Cover finish
- Matte
- Interior
- Standard Black & White
- Dimensions
- 5.5 in - 8.5 in
- Pages
- 160 Pages